हम जब ब्लड ग्रुप की बात करते है तो सिर्फ ब्लड ग्रुप A, B, AB या O ही जेहन में आता है। लेकिन विज्ञान की दुनिया में इनसे कहीं आगे की एक ऐसी खोज हुई है जिसने मेडिकल साइंस को चौंका दिया है। एक ऐसा ब्लड ग्रुप जो पूरी धरती पर सिर्फ और सिर्फ एक ही इंसान में पाया गया है।
Guada Negative ब्लड ग्रुप
इस खोज को जून 2025 में मिलान में हुए ISBT सम्मेलन यानी International Society of Blood Transfusion में आधिकारिक तौर पर मान्यता दी गई है। यह ब्लड ग्रुप अब आधिकारिक रूप से दुनिया की 48वीं ब्लड ग्रुप सिस्टम के रूप में मान्यता प्राप्त कर चुका है।
फ्रांसीसी वैज्ञानिकों ने एक ऐसी खोज की है जिससे मेडिकल वर्ल्ड बिल्कुल ही हैरान है। एक सामान्य ब्लड टेस्ट के दौरान Guadeloupe की एक 68 साल की महिला में दुनिया का सबसे दुर्लभ ब्लड ग्रुप पाया गया है। जिसे ग्वाडा नेगेटिव (Guada Negative) यह नाम दिया गया है।
क्यों दिया गया Guada Negative नाम ?
Guadeloupe एक द्वीप है। एक आइलैंड है जो फ्रांस का एक ओवरसीज रीजन है जो पूर्वी कैरेबियन सागर में लीवार्ड द्वीप समूह में स्थित है। ग्वाडा शब्द, ग्वाडे लूप द्वीप का स्थानीय नाम है और इस खोज को सम्मान देने के लिए ही इस ब्लड ग्रुप को ग्वाडा नेगेटिव (Guada Negative) नाम दिया गया है। यह ब्लड ग्रुप इतना अनोखा है कि यह दुनिया में केवल एक ही इंसान में पाया गया है। अब यह महिला किसी दूसरे ब्लड डोनर से खून नहीं ले सकती क्योंकि उसका ब्लड ग्रुप किसी भी दूसरे ब्लड ग्रुप से मेल नहीं खाता है। इस खोज को ISBT (International Society of Blood Transfusion) ने जून 2025 में आधिकारिक तौर पर 48वें ब्लड ग्रुप के रूप में मान्यता दी है।
कैसे हुई इस नए ब्लड ग्रुप की खोज?
यह कहानी 2011 में शुरू हुई जब ग्वाडे लूप (Guadeloupe) की एक 68 साल की महिला जो उस समय पेरिस में रह रही थी। एक सर्जरी से पहले एक रेगुलर ब्लड टेस्ट के लिए गई। जांच के दौरान डॉक्टरों ने उसके ब्लड में एक असामान्य एंटीबॉडी पाया जो किसी भी ज्ञात ब्लड ग्रुप से मेल नहीं खाता था। उस समय की कुछ तकनीकी सीमाओं के कारण इस रहस्य को सुलझाना संभव नहीं हो पाया।
साल 2019 में नई पीढ़ी की डीएनए सीक्वेंसिंग तकनीक यानी नेक्स्ट जनरेशन सीक्वेंसिंग की मदद से वैज्ञानिकों ने इस महिला के ब्लड का फिर से विश्लेषण किया। उन्होंने पाया कि महिला के ब्लड में एक विशेष जीन जिसे पीआईजीजेड जीन कहा जाता है उसमें एक म्यूटेशन है और यह जीन एक एंजाइम बनाता है जो लाल रक्त कोशिकाओं यानी रेड ब्लड सेल्स की सतह पर एक विशेष प्रकार की शुगर मॉलिक्यूल को जोड़ता है। इस शुगर मॉलिक्यूल की अनुपस्थिति के कारण महिला के ब्लड में ईएमएम एंटीजन जो कि लगभग सभी मनुष्यों में पाया जाता है वो नहीं था। और इस अनोखे बदलाव ने एक नया ब्लड ग्रुप बनाया जिसे ईएमएम नेगेटिव या गवाडा नेगेटिव नाम दिया गया।
Guada Negative ब्लड ग्रुप की विशेषताएं
- ईएमएम एंटीजन की अनुपस्थिति I यानी ग्वाडा नेगेटिव ब्लड ग्रुप की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें ईएमएम एंटीजन नहीं होता है जो कि सामान्य रूप से सभी लोगों के रेड ब्लड सेल्स में मौजूद होता है और यही इसे अत्यंत ही दुर्लभ बनाता है।
- कोई मैच नहीं। यानी यह महिला दुनिया में एकमात्र ऐसी महिला है जिसका ब्लड केवल और केवल उसके अपने ब्लड से ही मेल खाता है।
- जेनेटिक म्यूटेशन। यानी यह ब्लड ग्रुप उस महिला को अपने माता-पिता से विरासत में मिला होगा। जिनमें से प्रत्येक के पास इस बदली हुई जीन की एक कॉपी थी और इस तरह के केस को होमो रिसेसिव म्यूटेशन कहा जाता है। जिसमें दोनों जीन की दोषपूर्ण कॉपीज एक व्यक्ति को मिलती है।
- चिकित्सकीय प्रभाव। यानी इस महिला को हल्की बौद्धिक अक्षमता यानी माइल्ड इंटेलेक्चुअल डिसेबिलिटी है। उसने दो बच्चों को जन्म के समय खो दिया है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह समस्याएं पीआईजीजेड जीन में म्यूटेशन से संबंधित हो सकती हैं।
इस खोज का वैज्ञानिक महत्व
ग्वाडा नेगेटिव की खोज सिर्फ एक वैज्ञानिक खोज नहीं है बल्कि इसका मेडिकल के क्षेत्र में काफी व्यापक प्रभाव है। जैसे कि ब्लड ट्रांसफ्यूजन में सुरक्षा, दुर्लभ ब्लड ग्रुप्स की पहचान करना, ब्लड ट्रांसफ्यूजन को सुरक्षित बनाने के लिए काफी महत्वपूर्ण है।
रेयर ब्लड डोनर रजिस्ट्री यानी इस खोज ने अंतरराष्ट्रीय रेयर ब्लड डोनर रजिस्ट्रीज के महत्व को रेखांकित किया है जो किसी इमरजेंसी में जीवन रक्षक सहायता प्रदान कर सकते हैं।










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