आज के दौर में साइबर क्राइम सबसे तेजी से बढ़ते अपराधों में से एक बन चुका है। रोजाना धोखाधड़ी, फर्जी कॉल, सोशल मीडिया पर अफवाह और ऑनलाइन ठगी के सैकड़ों मामले सामने आते हैं। आम लोग जाने-अनजाने में इनका शिकार हो जाते हैं। लेकिन अब महाराष्ट्र पुलिस ने इस खतरे से निपटने के लिए एक अत्याधुनिक तकनीक विकसित की है — जिसका नाम है “गरुड़ दृष्टि”।
क्या है गरुड़ दृष्टि ?
“गरुड़ दृष्टि” एक सोशल मीडिया मॉनिटरिंग और साइबर इंटेलिजेंस सिस्टम है। इसका मुख्य उद्देश्य इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर होने वाली अवैध गतिविधियों, नफरत फैलाने वाले कंटेंट और साइबर फ्रॉड का पता लगाना और उन पर त्वरित कार्रवाई करना है।
इस सिस्टम को नागपुर पुलिस ने विकसित किया है और हाल ही में पुलिस भवन में इसकी प्रेजेंटेशन हुई, जिसमें मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी मौजूद रहे। उन्होंने इसे साइबर अपराध और सांप्रदायिक नफरत फैलाने वालों के खिलाफ एक मजबूत हथियार बताया।
कैसे काम करता है यह सिस्टम ?
गरुड़ दृष्टि इंटरनेट और सोशल मीडिया पर लगातार नजर रखता है।
- अफवाह फैलाने वाले पोस्ट, मैसेज या वीडियो की पहचान करता है
- दंगा भड़काने जैसी कोशिशों को ट्रैक करता है
- साइबर फ्रॉड और धोखाधड़ी के मामलों में सबूत इकट्ठा करता है
- संदिग्ध बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और ऑनलाइन ट्रांजैक्शंस पर नजर रखता है
अब तक इस सिस्टम की मदद से 30000 से ज्यादा पोस्ट की जांच की जा चुकी है, जिनमें से 650 पोस्ट हटाई गईं। साथ ही, ठगी के शिकार हुए 7000 से अधिक लोगों के लाखों रुपये वापस करवाने में भी यह तकनीक मददगार साबित हुई है।
क्यों है गरुड़ दृष्टि की जरूरत ?
पारंपरिक अपराध जैसे चोरी और डकैती के मुकाबले अब साइबर क्राइम कहीं ज्यादा हो रहे हैं। इनमें ऑनलाइन बैंक फ्रॉड, फर्जी कॉल, डेटा हैकिंग, सोशल मीडिया स्कैम, और अफवाह फैलाना शामिल है।
एक ताजा उदाहरण नवंबर 2024 का है, जब मुंबई के कोलाबा में मर्चेंट नेवी के एक रिटायर्ड कैप्टन के साथ ₹11 करोड़ की ऑनलाइन ठगी हुई। इसी तरह 2025 के मार्च-अप्रैल में ₹16 करोड़ के साइबर फ्रॉड का मामला सामने आया, जिसमें पुलिस ने 50 से ज्यादा सिम कार्ड, कई एटीएम कार्ड और अन्य सबूत बरामद किए।
गरुड़ दृष्टि का ऑपरेशन मॉडल
इस सिस्टम के लिए एक डेडिकेटेड टीम बनाई गई है, जिसमें
- पुलिस के साइबर क्राइम विशेषज्ञ
- बैंकिंग सेक्टर से जुड़े अधिकारी
- इंफॉर्मर्स (मुखबिर)
- क्राइम ब्रांच और एटीएस के सदस्य
सभी मिलकर एक कोऑर्डिनेटेड नेटवर्क की तरह काम करते हैं। सिस्टम सिर्फ बैंक खातों तक सीमित नहीं है, बल्कि संदिग्ध फोन नंबर, ईमेल एड्रेस, और सोशल मीडिया अकाउंट्स को भी ट्रैक करता है। फेसबुक, ट्विटर (X), इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर आपत्तिजनक कंटेंट की तुरंत पहचान की जाती है और कार्रवाई होती है।
आम लोगों को कैसे बचा रहा है गरुड़ दृष्टि ?
यह तकनीक न केवल अपराधियों तक पहुंचने में मदद करती है, बल्कि आम नागरिकों को ठगी और मानसिक उत्पीड़न से भी बचाती है। कई बार साइबर ठगी के पीड़ित समय पर रिपोर्ट दर्ज कराते हैं, तो गरुड़ दृष्टि की मदद से उनका पैसा ट्रैक करके वापस किया जा सकता है।
एक दिलचस्प बात यह है कि यह सिस्टम उन सोशल मीडिया अफवाहों को भी पकड़ लेता है, जो सांप्रदायिक तनाव या दंगे भड़का सकती हैं। इस तरह यह सिर्फ वित्तीय सुरक्षा ही नहीं, बल्कि सामाजिक शांति बनाए रखने में भी भूमिका निभा रहा है।
निष्कर्ष
गरुड़ दृष्टि महाराष्ट्र पुलिस की डिजिटल सुरक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी पहल है। यह तकनीक न केवल साइबर अपराधियों को पकड़ने में कारगर है, बल्कि सोशल मीडिया पर फैल रही नफरत और अफवाहों को भी रोकने का काम कर रही है।
तेजी से बदलते डिजिटल युग में ऐसे टूल्स ही हमें सुरक्षित रख सकते हैं। अगर इस तरह की तकनीक देशभर में लागू हो जाए, तो साइबर अपराधियों के लिए जगह और भी कम हो जाएगी।
यह कंटेंट DD NEWS से इंस्पायर्ड है।










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