भारत की स्वदेशी वायु शक्ति (Indigenous Air Power) की खोज अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुँचने वाली है। भारत के रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने पुष्टि की है कि सितंबर 2025 तक भारतीय वायुसेना (IAF) को पूरी तरह से सुसज्जित और फ्रंटलाइन ऑपरेशनल क्षमता वाले पहले दो Tejas MK1A Fighter Jet सौंप दिए जाएंगे।
यह डिलीवरी 2016 में सेवा में शामिल हुए Tejas विमानों से एक बड़ा कदम आगे है। वर्तमान में भारतीय वायुसेना की दो स्क्वाड्रन दक्षिण भारत में लगभग 40 Tejas Jets का संचालन कर रही हैं। अब Mark1 Alpha वर्ज़न, जिसमें सभी आधुनिक हथियार एकीकृत (full weapon integration) किए गए हैं, वास्तविक ऑपरेशनल तैनाती के लिए तैयार है।
सरकारी अनुबंध और HAL की जवाबदेही
सरकार ने स्पष्ट किया है कि हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के साथ नए अनुबंध तभी साइन होंगे जब मौजूदा 83 विमानों का ऑर्डर प्रगति पर होगा और कम से कम दो कॉम्बैट-रेडी यूनिट्स भारतीय वायुसेना को सौंप दिए जाएंगे। इस “माइलस्टोन आधारित जवाबदेही” से ही भविष्य में HAL की विश्वसनीयता तय होगी।
रक्षा बजट और मेक इन इंडिया को बढ़ावा
वित्त वर्ष 2025 में भारत का रक्षा पूंजीगत व्यय (Defense Capital Expenditure) ₹1.6 लाख करोड़ पार कर गया, जिसमें से 81% खर्च घरेलू स्तर पर हुआ। हाल ही में कैबिनेट ने ₹62,000 करोड़ की लागत से 97 अतिरिक्त Tejas MK1A Jets का ऑर्डर मंजूर किया है।
- पहले के 83 विमानों के सौदे के साथ मिलाकर अब भारतीय वायुसेना को कुल 180 Tejas MK1A विमान मिलेंगे।
- ये विमान वायुसेना के पुराने हो चुके MiG-21 फ्लीट की जगह लेंगे।
- 65% से अधिक पुर्जे भारत में निर्मित हो रहे हैं, जिससे MSMEs और स्वदेशी सप्लाई चेन को मजबूती मिल रही है।
यह केवल संख्याओं की बात नहीं है, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक रणनीतिक और आर्थिक आवश्यकता भी है।
प्राइवेट सेक्टर और ड्रोन ट्रायल्स
रक्षा सचिव ने यह भी कहा कि अब निजी उद्योगों को बराबर अवसर दिए जा रहे हैं। ऑपरेशन सिंदूर के बाद किए गए सफल ट्रायल्स के चलते भारत के ड्रोन प्लेटफॉर्म्स ने भी अहम मूल्यांकन पास कर लिया है। यह साफ संकेत है कि भारत मानव रहित युद्ध प्रणाली (Unmanned Warfare Systems) में भी आत्मविश्वास से आगे बढ़ रहा है।
भविष्य की तैयारी: Tejas MK2 और AMCA
Tejas MK1A तो बस शुरुआत है। Hindustan Aeronautics Limited (HAL) पहले से ही 200 से ज्यादा Tejas MK2 फाइटर Jets पर काम कर रही है, जिनमें GE F414 (General Electric (GE) F414) इंजन लगेंगे। साथ ही, भारत का Advanced Medium Combat Aircraft (AMCA) – यानी 5वीं पीढ़ी का स्टेल्थ Fighter Jet – भी उन्नत योजना चरण में है।
ये सभी प्लेटफॉर्म्स मिलकर 2030 के दशक के मध्य तक भारतीय वायुसेना की रीढ़ साबित होंगे।
रक्षा निर्यात और वैश्विक पहचान
भारत का रक्षा निर्यात पिछले एक दशक में 34 गुना बढ़ चुका है और वित्त वर्ष 2025 में यह ₹23,622 करोड़ तक पहुँच गया। अनुमान है कि 2029 तक यह ₹50,000 करोड़ को पार करेगा।
- Tejas को भारत का फ्लैगशिप एक्सपोर्ट फाइटर माना जा रहा है।
- एशिया, अफ्रीका और पश्चिमी सहयोगी देशों की वायुसेनाओं ने इसमें रुचि दिखाई है।
पिछले बीते दिनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी Tejas ट्रेनर वर्ज़न में उड़ान भरी थी, जो इस प्रोजेक्ट को राजनीतिक समर्थन और राष्ट्रीय गर्व का प्रतीक बनाता है।
निष्कर्ष
सितंबर 2025 में जब पहले दो Tejas MK1A Jets भारतीय वायुसेना को सौंपे जाएंगे, तो यह केवल MiG-21 के प्रतिस्थापन का प्रतीक नहीं होगा, बल्कि भारत के सबसे बड़े स्वदेशी एविएशन प्रोजेक्ट की ऐतिहासिक उपलब्धि होगी।
अगर HAL समय पर डिलीवरी कर देता है, तो भारत केवल आत्मनिर्भर (Atma Nirbhar) ही नहीं बनेगा, बल्कि आने वाले दशकों में फ्रंटलाइन कॉम्बैट एयरक्राफ्ट का वैश्विक निर्यातक भी उभर सकता है।
Source: DD India
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