गांधीनगर/कानपुर। साइबर अपराधों से निपटने के लिए भारत ने एक और अहम उपलब्धि हासिल की है। आईआईटी कानपुर के स्टार्टअप इनक्यूबेशन सेंटर के सहयोग से “Chitragupta Mobile Forensic Suit” तैयार किया गया है। यह एक कॉम्पैक्ट और आधुनिक मशीन है, जो मोबाइल की फॉरेंसिक जांच और डिजिटल डेटा हासिल करने की प्रक्रिया को तेज और आसान बना देगी।
I4C (इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर) के अनुसार 90% से अधिक अपराधों में मोबाइल फोन की अहम भूमिका होती है। कई मामलों में अपराध की योजना बनाने से लेकर उसे अंजाम देने और सबूत जुटाने तक मोबाइल फोन ही प्रमुख साधन साबित होता है।
अब तक मोबाइल को जब्त करके फॉरेंसिक लैब भेजना, वहां स्कैन करना और डेटा निकालना एक लंबी प्रक्रिया थी। इसी वजह से जांच और न्याय में देरी होती थी।

स्टार्टअप की पहल से बना इनोवेटिव प्रोडक्ट
इसी चुनौती का हल खोजने के लिए फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी गांधीनगर के रुशित सोनी ने अपनी कंपनी फॉरेंसिक साइबरटेक के माध्यम से “Chitragupta Mobile Forensic Suit” विकसित किया। इस स्टार्टअप को आईआईटी कानपुर के स्टार्टअप इनक्यूबेशन सेंटर से भी सहयोग मिला।
Chitragupta Mobile Forensic Suit इतना छोटा और पोर्टेबल है कि इसे सीधे क्राइम सीन पर ले जाया जा सकता है। इसके जरिए किसी भी Android या iPhone का डेटा सुरक्षित तरीके से निकाला और बैकअप लिया जा सकता है।
Chitragupta Mobile Forensic Suit : हाईटेक फीचर्स से लैस
- Chitragupta Mobile Forensic Suit क्लाउड एप्लिकेशनों, एन्क्रिप्टेड ऐप्स, सोशल मीडिया ऐप्स और यहां तक कि हिडन एप्स से भी जानकारी निकाल सकता है।
- बैकअप लेने के बाद डेटा का तुरंत विश्लेषण (On-the-spot Analysis) किया जा सकता है।
- इसमें लगे AI मॉड्यूल्स की मदद से इमेज पहचान और क्लासिफिकेशन जैसी एडवांस सुविधाएं मिलती हैं।
इस तरह Chitragupta Mobile Forensic Suit जांच एजेंसियों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकता है।
युवाओं के स्टार्टअप्स बदल रहे तस्वीर
Chitragupta Mobile Forensic Suit सिर्फ तकनीकी नवाचार नहीं, बल्कि इस बात का भी उदाहरण है कि भारत का युवा टैलेंट बड़ी समस्याओं का समाधान छोटे-छोटे स्टार्टअप्स से कर रहा है। Chitragupta Mobile Forensic Suit ऐसा ही एक कदम है, जो अपराध जांच की प्रक्रिया में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है।
आईआईटी कानपुर का विज़न
आईआईटी कानपुर के डायरेक्टर प्रो. मनींद्र अग्रवाल का कहना है कि संस्थान का फोकस साइबर सिक्योरिटी, ड्रोन टेक्नोलॉजी, मेडटेक और सस्टेनेबल टेक्नोलॉजी पर है। स्टार्टअप इनक्यूबेशन सेंटर के माध्यम से कई डीपटेक स्टार्टअप्स को न केवल प्रोत्साहित किया जाता है, बल्कि फंडिंग और सहयोग भी दिया जाता है।
उनके मुताबिक, हाल ही में हुए ऑपरेशन सिंदूर ने साफ कर दिया है कि भविष्य का दौर साइबर वॉरफेयर और टेक्निकल वॉरफेयर का है। इसी वजह से आईआईटीज, डीआरडीओ और इसरो जैसी संस्थाएं लगातार रिसर्च कर रही हैं और देश को आत्मनिर्भर बनाने में योगदान दे रही हैं।
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम
अब तक अधिकतर साइबर सिक्योरिटी प्रोडक्ट्स विदेशों से आयात किए जाते थे, जो महंगे होने के साथ कई तकनीकी समस्याओं से भी जुड़े थे। लेकिन अब भारतीय स्टार्टअप्स स्वदेशी समाधान लेकर सामने आ रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में साइबर सिक्योरिटी के प्रमुख उत्पाद पूरी तरह भारत में ही विकसित होंगे, जिससे देश न केवल आत्मनिर्भर बनेगा बल्कि वैश्विक स्तर पर भी मजबूत पहचान बनाएगा।
निष्कर्ष
Chitragupta Mobile Forensic Suit बेहद सरल और उपयोग में आसान है, जो मोबाइल की फॉरेंसिक जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। आज देश का युवा लगातार नई प्रतिभा और नवाचार के साथ सामने आ रहा है। कई स्टार्टअप्स ऐसी बड़ी समस्याओं का हल छोटे स्तर पर निकाल रहे हैं, जो पहले मुश्किल माना जाता था। Chitragupta Mobile Forensic Suit भी ऐसा ही एक स्टार्टअप है, जो मोबाइल फॉरेंसिक के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है।
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लेख का Source –> DD News










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