इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू हो गई है। उनके घर पर जले हुए नोट मिलने के बाद यह कदम उठाया गया। सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों के 150 सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को ज्ञापन सौंपा जिसमें बीजेपी समेत कई दलों के सांसद शामिल हैं।
सरकारी आवास से जली हुई नगदी बरामदगी के मामले में फंसे जस्टिस यशवंत वर्मा को पद से हटाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। संसद का सत्र शुरू होते ही संसद में उनके खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू करने की कवायद तेज हो गई है। जस्टिस यशवंत वर्मा को हटाने के लिए सांसदों ने सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने से जुड़ा ज्ञापन सौंपा। इस पर 150 से अधिक लोकसभा सदस्यों ने हस्ताक्षर किए हैं। हस्ताक्षर करने वालों में बीजेपी, कांग्रेस, टीडीपी, जेडीयू, जनता दल, सेकुलर, असमगढ़ परिषद, शिवसेना, जनसेना पार्टी, सीपीएम, एसकेपी, लोक जनशक्ति पार्टी, स्वराज इंडिया पार्टी समेत तमाम दल शामिल हैं।
इन लोगों ने संविधान के अनुच्छेद 124, अनुच्छेद 217 और 218 के तहत हस्ताक्षर करके नोटिस दिया है। हस्ताक्षर करने वालों में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के अलावा बीजेपी से सांसद अनुराग सिंह ठाकुर, रविशंकर प्रसाद, राजीव प्रताप रूढ़ी, पीपी चौधरी, सुप्रिया सुले और केसी वेणुगोपाल आदि शामिल हैं।
राज्यसभा में भी इसी संबंध में एक अलग प्रस्ताव का नोटिस कांग्रेस सांसद और विहिप नासिर हुसैन ने दिया है। जिसे 50 से अधिक सांसदों का समर्थन प्राप्त है।
किसी भी जज को हटाने के प्रस्ताव पर लोकसभा में कम से कम 100 या फिर राज्यसभा में 50 सांसदों के हस्ताक्षर होने चाहिए। राज्यसभा में जब यह मसला आया, तब सभापति ने सदस्यों को इस प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी। इससे पहले केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजेजू ने भी कहा था कि ज्यादातर प्रमुख दल इस मामले में साथ हैं।
क्यों किया जा रहा है जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग ?
जस्टिस वर्मा के खिलाफ यह कदम इसलिए उठाया जा रहा है क्योंकि उनके दिल्ली स्थित सरकारी निवास पर 15 मार्च 2025 को ₹500 के अधले नोटों का बंडल पाए जाने का मामला सामने आया था। यह मामला सामने आने के बाद सांसदों ने न्यायपालिका के निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए इस मुद्दे को संसद में उठाया। अब संसद इस मामले की गंभीरता से जांच करेगी और तय करेगी कि क्या जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग की कार्यवाही को आगे बढ़ाया जाए।
उधर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ नकदी बरामदगी विवाद में एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली याचिका की तत्काल सुनवाई से इंकार कर दिया। वकील मैथ्यूज निदुमपारा ने चीफ जस्टिस बी आर गवई और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच से गुजारिश की कि यह उनकी तीसरी याचिका है और इसे जल्द से जल्द सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए।










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